मेरठ, अप्रैल 4 -- सलीम अहमद मेरठ।दिल्ली कैपिटल्स के युवा ऑलराउंडर समीर रिजवी अपनी टीम को जिताकर रातों-रात सुर्खियों में आ गए हैं। मगर इस सफलता के पीछे उनकी जिद थी, जो पिता का विरोध भी उन्हें नहीं रोक सका। बाहर नहीं जाने दिया तो घर को 'स्टेडियम' बना लिया। गमले-शीशे, बल्ब और न जाने क्या-क्या चटका दिये। 10वीं की परीक्षाएं तक छोड़ दीं। आखिर में उन्होंने मंजिल पाकर ही दम लिया।मेरठ के खैरनगर में जन्मे 22 वर्षीय समीर के पिता हाजी हसीन अख्तर का क्रिकेट से कोई नाता नहीं था। वह मारुति कंपनी में नौकरी करते थे। समीर के मामा तनकीब अख्तर क्रिकेट कोच थे। तनकीब ही वह शख्स थे जो पहली बार समीर को क्रिकेट मैदान पर ले गए।उंगली थामकर गांधीबाग गए, हाथ में बल्ला लेकर लौटे! :समीर के क्रिकेटर बनने की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं। तनकीब ने बताया कि समीर जब पांच-छह ...
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