मेडिकल : जब वेंटिलेटर हार जाए, ईसीएमओ थामे सांसों की डोर
लखनऊ, अगस्त 23 -- -लोहिया संस्थान में ईसीएमओ पर कार्यशाला में विशेषज्ञों ने साझा की जानकारी यह भी पढ़ें- वेंटिलेटर से न संभले सांसों का संकट तो ईसीएमओ आखिरी सहारा लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता। गंभीर बीमारी में जब फेफड़े शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं दे पाते और वेंटिलेटर के बावजूद मरीज की हालत नहीं संभलती, तब ईसीएमओ (इक्मो) जीवन बचाने का महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है। गंभीर निमोनिया, फेफड़ों के अचानक फेल होने, गंभीर हार्ट फेल्योर और कार्डियोजेनिक शॉक जैसे चुनिंदा मरीजों में डॉक्टर इसकी मदद लेते हैं। यह जानकारी लोहिया संस्थान में एनस्थीसिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. पीके दास ने दी।कार्यशाला का उद्देश्य वह रविवार को ईक्मो पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। एनस्थीसिया विभाग के सभागार में कार्यशाला हुई। डॉ. पीके दास ने कहा कि ईसीएमओ यानी एक्स्ट्राक...
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