दुमका, मार्च 17 -- मृत्यु से पूर्व प्रभु की शरण मिल जाए, तो जीव का कल्याण निश्चित है : कथा वाचिका -श्रीमद्भागवत कथा तीसरे दिन दिया व्याकुलता, शुकदेव आगमन और राजा परीक्षित का वैराग्य पर प्रवचनरामगढ़, प्रतिनिधि।रामगढ़ प्रखंड अंतर्गत बोड़ीया में सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन की कथा में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की त्रिवेणी बही। श्रीधाम वृंदावन से पधारी कथा वाचिका दिव्या देवी ने विस्तार से बताया कि कैसे संसार को सबसे बड़ा ग्रंथ श्रीमद्भागवत महापुराण प्राप्त हुआ और कैसे एक राजा के श्राप ने लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। कथा वाचिका ने बताया कि चारों वेदों, महाभारत और पुराणों की रचना के बाद भी महर्षि वेदव्यास जी का मन अशांत था। वे सरस्वती नदी के तट पर चिंतामग्न थे। तभी देवर्षि नारद का आगमन हुआ।नारद मुनि ने महामुनि व्यास को समझाया कि ...