नई दिल्ली, अप्रैल 14 -- पति की मौत के बाद जिस बीमा पॉलिसी से राहत मिलने की उम्मीद थी, उसी ने ऐन वक्त पर साथ छोड़ दिया। ऐसे में विधवा उपभोक्ता को न केवल अपनों को खोने का गम सहना पड़ा, बल्कि वह कर्ज और बीमा कंपनी की बेरुखी के बीच कानूनी लड़ाई में भी उलझ गई। बीमा कंपनी ने मौत की वजह को तकनीकी जाल में उलझाकर क्लेम खारिज कर दिया था, लेकिन आखिरकार अस्पताल की ओर से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र ने पूरा मामला पलटते हुए करीब छह साल बाद पीड़िता को न्याय दिलाया। उत्तर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मामले में बीमा कंपनी की मनमानी पर सख्त रुख अपनाया। आयोग अध्यक्ष दिव्य ज्योति जयपुरियार, सदस्य अश्विनी कुमार मेहता और हरप्रीत कौर चर्या की पीठ ने एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को फटकार लगाते हुए पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने कंपनी को निर्द...
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