मृत्यु के बाद तेरहवीं नहीं करने पर क्या होता है? जानें क्या लिखा है गरुड़ पुराण में
नई दिल्ली, अगस्त 18 -- हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद कई संस्कार किए जाते हैं। इनमें तेरहवीं का विशेष महत्व माना जाता है। गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प में आत्मा की यात्रा और संबंधित कर्मकांडों का वर्णन मिलता है। तेरहवीं नहीं करने पर क्या होता है, यह जानना कई परिवारों के लिए जरूरी सवाल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये संस्कार आत्मा की शांति और परलोक गमन के लिए किए जाते हैं।तेरहवीं क्यों मानी जाती है महत्वपूर्ण? गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद शुरुआती दिनों को आत्मा की यात्रा से जोड़ा जाता है। तेरहवें दिन किए जाने वाले संस्कारों का उद्देश्य मृत व्यक्ति के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना और उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करना है। इस दौरान पिंडदान, तर्पण, ब्राह्मण भोजन और दान जैसे कर्म किए जाते हैं। ये क्रियाएं परिजनों के धार्मिक कर्तव्य क...
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