नई दिल्ली, अक्टूबर 16 -- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र और अन्य पक्षों से एक याचिका पर जवाब मांगा है। इस याचिका में मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत 'तलाक' के सभी रूपों को नियंत्रित करने के लिए एक समान प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय और दिशा-निर्देश बनाने और लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता के वकील ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ को बताया कि उन्होंने 'तलाक-ए-हसन' की वैधता को भी चुनौती दी है। 'तलाक-ए-हसन' मुसलमानों में तलाक का एक ऐसा रूप है, जिसमें एक पुरुष तीन महीने की अवधि तक हर महीने एक बार 'तलाक' शब्द बोलकर शादी खत्म कर सकता है। पीठ ने इस याचिका को एक मुस्लिम महिला द्वारा दायर की गई पहले से लंबित याचिका के साथ जोड़ दिया है। उस महिला ने अपने पति द्वारा दिए गए 'तलाक-ए-हसन' की वैध...