नई दिल्ली, सितम्बर 23 -- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा। याचिका में मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत मुसलमानों में विरासत और उत्तराधिकार से जुड़े बिना कोडिफाइड (बिना लिखित कानून वाले) नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। इसमें इन नियमों को लिंग-आधारित भेदभाव के आधार पर चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने युवा मामले और खेल मंत्रालय तथा कानून और न्याय मंत्रालय को नोटिस जारी किए और इम्तियाज हुसैन शहाबुद्दीन मुल्ला द्वारा दायर याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई। याचिका में कहा गया कि मौजूदा व्यवस्था लिंग-आधारित भेदभाव को बढ़ावा देती है, क्योंकि इसमें महिला उत्तराधिकारियों को उनके पुरुष समकक्षों की तुलना में विरासत का आधा हिस्सा मिलता ...