नई दिल्ली, अप्रैल 24 -- सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ 'आस्था बनाम मौलिक अधिकार' के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण सुनवाई कर रही है। इस दौरान पीठ के सदस्य जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और वरिष्ठ वकील एम. आर. शमशाद के बीच मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश और नमाज पढ़ने के तरीके को लेकर एक अहम चर्चा हुई।मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश पर कोई रोक नहीं जस्टिस अमानुल्लाह ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि सभी को यह पता होना चाहिए कि पैगंबर मोहम्मद के दौर से लेकर आज तक, इस्लाम में महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश करने और नमाज अदा करने पर कभी कोई पाबंदी नहीं रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस्लाम में कुछ रीति-रिवाज और प्रक्रियाएं जरूर हैं जो यह तय करती हैं कि महिलाएं अपनी प्रार्थना किस तरीके से करेंगी।महिलाओं के घर पर नमाज पढ़ने की असल वजह ट...