नई दिल्ली, सितम्बर 27 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने के मामले में पर्सनल लॉ के आधार पर छूट देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कानूनों के तहत आपराधिक दायित्व से छूट पाने के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ का आधार नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने एक मुस्लिम व्यक्ति को अपनी नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने के मामले में 'बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम' (POCSO) के तहत मुकदमा चलाने का निर्देश दिया। नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने केमामले में कोर्ट के सामने एक अनोखी स्थिति आई। पति-पत्नी ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत अपनी शादी को वैध बताते हुए अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग की। जस्टिस संजीव नरूला की बेंच ने कहा कि पर्सनल लॉ यह तय कर सकता है कि शादी हुई है या नहीं और इसके क्या कानूनी...