गौरीगंज, अगस्त 11 -- अमेठी। मुसाफिरखाना का कादूनाला का वन क्षेत्र अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए भी जाना जाता है। वर्ष 1857-58 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भाले सुल्तान के रणबांकुरों और अंग्रेजी सेना के बीच हुए भीषण संघर्ष का यह क्षेत्र साक्षी रहा है। इस युद्ध में देश के लिए बड़ी संख्या में भाले सुल्तानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी और उनके खून से कादूनाला का पानी लाल हो गया था। स्थानीय कहावत है "चमका जिनका भाला, उन वीरों की गौरव गाथा गाता कादूनाला।" इतिहास के अनुसार मार्च 1858 में जनरल फ्रैंक्स के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना कादूनाला की ओर बढ़ी। कादूनाला पुल के एक ओर अंग्रेजी सेना और दूसरी ओर भाले सुल्तान की राजपूत सेना ने मोर्चा संभाला। इस सेना में हिंदू-मुस्लिम राजपूत योद्धा शामिल थे और बाबू महमद ...