प्रयागराज, दिसम्बर 18 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि भीड़ द्वारा 'गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, सिर तन से जुदा, सिर तन से जुदा' का नारा लगाना कानून के अधिकार और भारत की संप्रभुता व अखंडता के लिए सीधी चुनौती है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने बरेली हिंसा के आरोपी रिहान की ज़मानत अर्जी पर सुनवाई के बाद कहा कि ऐसे नारे लोगों को सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसाते हैं और बीएनएस की धारा 152 के तहत दंडनीय हैं। कोर्ट ने कहा कि यह इस्लाम के मूल सिद्धांतों के भी खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि इस नारे का कुरान या मुसलमानों के किसी अन्य धार्मिक ग्रंथ में कोई जिक्र नहीं है। इसके बावजूद कई मुसलमान इसके सही अर्थ और प्रभाव को जाने बिना इस नारे का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी न...