अब्राहम थॉमस, मार्च 2 -- सुप्रीम कोर्ट ने गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज और बेड नहीं देने पर सख्त रुख अपनाते हुए दिल्ली के 51 प्राइवेट अस्पतालों को कंटेम्प्ट नोटिस जारी किया है। सर्वोच्च अदालत ने सरकार और जमीन देने वाली एजेंसियों को इस मामले में लापरवाही बरतने के लिए कड़ी फटकार लगाई है। दिल्ली के स्वास्थ्य सचिव को इस मामले में नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है ताकि दोषी अस्पतालों और सुस्त अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सके।छूट वापस क्यों न ली जाए? जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि इन अस्पतालों को नोटिस जारी किया जाए। 51 अस्पतालों से पूछा जाए कि सर्वोच्च अदालत के आदेश का उल्लंघन करने के लिए उनके खिलाफ कंटेम्प्ट की कार्रवाई क्यों न की जाए। दिल्ली सरकार की ओर से इन अस्पतालों को दी गई छूट क्यों न वापस ली जाए।51 अस्पतालों को...
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