अमरोहा, मार्च 6 -- अमरोहा/चुचैला कलां, हिटी। इस समय मुकद्दस माह-ए-रमजान का दूसरा अशरा चल रहा है, जो मगफिरत का है। यह अशरा गुनाहों की माफी और अल्लाह ताला से बख्शिश मांगने का खास दौर माना जाता है। इस अशरे में रोजेदार इबादत, तौबा-इस्तिगफार और कुरआन-ए-पाक की तिलावत के जरिए अपने गुनाहों की माफी की दुआ कर रहे हैं। मस्जिदों में नमाज और तरावीह का सिलसिला पूरी पाबंदी के साथ जारी है। उलेमाओं का कहना है कि रमजान का दूसरा अशरा बंदों के लिए अल्लाह की बारगाह में झुककर अपने गुनाहों से तौबा करने और मगफिरत हासिल करने का बेहतरीन मौका है। इस दौरान 'अस्तगफिरुल्लाह रब्बी मिन कुल्लि जंबि व अतूबु इलैह' का विर्द खास तौर पर करने की ताकीद की जाती है। मुफ्ती तैयब अहमद कासमी ने बताया कि रमजान बेशुमार बरकतों वाला महीना है। इसमें की गई एक नेकी का सवाब कई गुना बढ़ा दिय...