नई दिल्ली, जून 3 -- शादी से जुड़े मुकदमों का लंबे समय तक चलना, शादी को सिर्फ कागजों पर ही बनाए रखता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह बात 15 साल से अलग रह रहे जोड़े की शादी खत्म करते हुए कही। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि अदालतों ने बार-बार यह स्थापित किया है कि शारीरिक अंतरंगता से इनकार करना गंभीर भावनात्मक कष्ट देता है और शादी की नींव कमजोर करता है। पीठ ने कहा कि इसलिए हाईकोर्ट का निष्कर्ष सही माना जाता है। प्रतिवादी-पति की अपील को मंजूर करते हुए जो तलाक का आदेश दिया गया था, उसे बरकरार रखा जाता है। राजस्थान हाईकोर्ट ने पति के पक्ष में कई आधारों पर तलाक मंजूर किया था, जिसमें पत्नी द्वारा कई मौकों पर शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करके पति के साथ की गई क्रूरता भी शामिल थी।पीठ ने पाया कि पत्नी और पति, जिनकी शादी दिसंबर...