नई दिल्ली, दिसम्बर 9 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस बात पर जोर दिया कि हाईकोर्ट को किसी मामले को अनावश्यक रूप से पुनर्विचार के लिए वापस भेजने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे मुकदमेबाजी का एक नया दौर शुरू हो जाता है। न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने कहा कि विचार मुकदमेबाजी को कम करने का है, न कि उसे बढ़ाने का। पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक मामले को सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद नए सिरे से विचार के लिए वापस भेज दिया गया था। यह मामला प्राधिकारों द्वारा राजस्व मानचित्र में सुधार के लिए एक व्यक्ति के आवेदन को खारिज करने से संबंधित था। अपील पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत ने मानचित्र और 'फील्ड बुक' के रखरखाव से संबंधित उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 30 की गल...
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