मुकदमों के बोझ तले दब गए न्यायाधिकरण
नई दिल्ली, मार्च 7 -- पारंपरिक अदालतों, खासकर उच्च न्यायालयों में मुकदमों के बोझ कम करने और त्वरित न्याय देने के मकसद गठित विभिन्न न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) अब खुद मुकदमों के बोझ से दब गया है। कानून मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक विभिन्न न्यायाधिकरणों में 5 लाख से अधिक मामले लंबित हैं। इन न्यायाधिकरणों में मुकदमों के बोझ की प्रमुख वजह बड़े पैमाने पर अध्यक्ष, सदस्यों और कर्मियों की कमी है। कानून मंत्रालय के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि मुकदमों के बोझ की प्रमुख वजह न्यायाधिकरणों में अध्यक्ष, सदस्यों और कर्मचारियों की भारी कमी है। मंत्रालय के दिसंबर, 2025 तक आंकड़ों के मुताबिक विभिन्न न्यायाधिकरणों में सदस्यों के 18 फीसदी तक पद खाली है। आंकड़ों के मुताबिक 7 न्यायाधिकरणों में अध्यक्ष नहीं है, जबकि अलग-अलग न्यायाधिकरण में खाली 20 ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.