रांची, जून 18 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को मुकदमे की जानकारी थी और उसके पास अदालत में पेश होकर अपना पक्ष रखने का पूरा मौका था, तो वह सिर्फ समन की तकनीकी खामी का हवाला देकर एकपक्षीय (एक्स-पार्टी) डिक्री रद्द नहीं करा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में यह देखना जरूरी है कि संबंधित पक्ष वास्तव में सुनवाई में शामिल होना चाहता था या नहीं। जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने यह आदेश रांची के मौजा दतमा स्थित 10 डिसमिल जमीन से जुड़े एक विवाद की सुनवाई के दौरान की। मामले में ट्रायल कोर्ट ने वादी के पक्ष में एकपक्षीय डिक्री पारित की थी। बाद में प्रतिवादियों ने दावा किया कि उन्हें समन सही तरीके से नहीं मिला और उन्हें डिक्री की जानकारी काफी बाद में हुई, इसलिए डिक्री रद्द की जाए।

हिंदी...