बहराइच, सितम्बर 25 -- मिहींपुरवा, संवाददाता। जंगल से सटे गांवों में वन्य जीवों का खौफ बढ़ रहा है, लेकिन हमलों को रोकने के इंतजाम अब भी सवालों के घेरे में हैं। कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग में तेंदुए और बाघ आबादी के बीच पहुंचकर ग्रामीणों की जान ले रहे हैं। हादसे के बाद पांच लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है, मगर ग्रामीणों का सवाल है कि जान जाने के बाद मिलने वाला मुआवजा जिंदगी की सुरक्षा का विकल्प कैसे बन सकता है। करोड़ों की तार फेंसिंग के बावजूद वन्यजीवों की आवाजाही जारी है। कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के जंगल से सटे गांवों में वन्य जीवों के हमले में मौत के बाद पीड़ित परिवार को मिलने वाली पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता तत्काल राहत जरूर देती है, लेकिन किसी अपने को वापस नहीं ला सकती। ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजे से ज्यादा जरूरी वन्यजीवों ...