नई दिल्ली, मार्च 25 -- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को किसानों की दी गई राहत बरकरार रखते हुए कहा कि उचित मुआवजे की संवैधानिक गारंटी कमजोर नहीं की जा सकती। शीर्ष अदालत ने कहा कि भूमि अधिग्रहण मामले में सोलेशियम (मुआवजा) और ब्याज, अधिग्रहण करने वाले निकाय के वित्तीय बोझ की मात्रा पर निर्भर नहीं हो सकते। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के 4 फरवरी, 2025 के फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी। इस फैसले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि 2019 का उसका वह फैसला, जिसमें यह व्यवस्था दी गई थी कि एनएचएआई एक्ट के तहत भूमि गंवाने वाले किसानों को मुआवजा और ब्याज देने की अनुमति दी गई थी, वह पिछली तारीख से ही लागू होगा। पी...