मुंगेर, मार्च 13 -- ​मुंगेर, निज संवाददाता। जिले की सड़कों पर रफ्तार का कहर मासूम जिंदगियों को लील रहा है। विडंबना यह है कि सड़क दुर्घटना के बाद जिस 'गोल्डन ऑवर' (दुर्घटना के तुरंत बाद का एक घंटा) में मरीज की जान बचाई जा सकती है, वह समय रेफर होने और एंबुलेंस के धक्कों में बीत जाता है। आंकड़ों की भयावह तस्वीर यह है कि बीते एक साल में 150 से अधिक गंभीर मरीजों को रेफर किया गया, जिनमें से 17 लोगों ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ दिया।​तीन नेशनल हाईवे, पर सुरक्षा का कोई 'सेफ्टी नेट' नहींः​मुंगेर प्रमंडलीय मुख्यालय होने के साथ-साथ तीन महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों- एनएच-80, एनएच-333A और एनएच-333बी से जुड़ा है। सरकारी प्रावधानों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रत्येक 50 किलोमीटर पर एक ट्रामा सेंटर होना...