मुंगेर, अप्रैल 15 -- मुंगेर, निज प्रतिनिधि। मुंगेर जिले में दलहन खेती का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है। मौसम की बेरुखी, सिंचाई की कमी और बढ़ती लागत ने किसानों को अरहर, मसूर और चना जैसी पारंपरिक फसलों से दूर कर दिया है। नतीजा ये है कि जिले की पहचान रही दलहन खेती अब संकट में है। एक समय महमदा पाटम क्षेत्र बड़े पैमाने पर अरहर उत्पादन के लिए जाना जाता था। यहां की सुगंधित अरहर की मांग न केवल जिले में बल्कि दूसरे जिलों और राज्यों तक थी। स्थानीय बाजारों में इस अरहर की अलग पहचान थी। लेकिन बदलते मौसम और खेती की बढ़ती लागत ने किसानों को धीरे-धीरे इस फसल से दूर करता जा रहा है। यह भी पढ़ें- दलहन के लिए कोई स्थानीय मंडी या बाजार उपलब्ध नहीं आज अरहर की खेती गिने-चुने खेतों में सिमट कर रह गई है।----टाल क्षेत्र में 60 प्रतिशत तक घटा मसूर-चना का रकबा :बरियारप...
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