नई दिल्ली, अप्रैल 9 -- केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से जनहित याचिकाओं (PIL) के ढांचे की समीक्षा करने और इसे पूरी तरह से समाप्त करने का आग्रह किया है। सरकार का तर्क है कि जिस उद्देश्य से जनहित याचिका की शुरुआत की गई थी, वह अब काफी हद तक पूरा हो चुका है और वर्तमान में इसका दुरुपयोग अधिक हो रहा है। यह महत्वपूर्ण दलील सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 9 जजों की संविधान पीठ के समक्ष दी।जनहित याचिका (PIL) क्या है और इसकी शुरुआत क्यों हुई थी? जनहित याचिका की व्यवस्था मुख्य रूप से उन लोगों के लिए शुरू की गई थी जो सामाजिक या आर्थिक रूप से कमजोर थे। इसका लक्ष्य यह था कि जो लोग गरीबी, अशिक्षा, विकलांगता या सामाजिक बहिष्कार के कारण खुद अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकते, उनके अधिकारों की रक्षा...
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