नई दिल्ली, मई 14 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कच्छ के बहुचर्चित गोचर (चरागाह) भूमि विवाद में एक अहम फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ताओं को कड़ी फटकार लगाई है। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि खुली अदालत में जजों द्वारा बोला गया मौखिक आदेश और बाद में जारी किए गए अंतिम लिखित आदेश में बड़ा अंतर है। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि यह बदलाव अडानी पोर्ट्स को फायदा पहुंचाने वाला है। अदालत ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग' और 'अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने' का प्रयास बताया। साथ ही, याचिकाकर्ताओं पर 2,000-2,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।क्या था याचिकाकर्ताओं का दावा? बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ ने 27 जनवरी को इस मामले (फकीर मोहम्मद सुलेमान समेजा बनाम अडानी प...