नई दिल्ली, फरवरी 12 -- चंद्रकांत लहारिया,जन-स्वास्थ्य विशेषज्ञ पिछले दिनों राजस्थान के टोंक जिले में पुलिस ने एक ऐसी फैक्टरी का भंडाफोड़ किया, जहां से रोजाना लगभग 80 हजार लीटर मिलावटी दूध अजमेर, टोंक और जयपुर सहित कई शहरों में भेजा जा रहा था। यह एकमात्र या पहली ऐसी घटना नहीं है। जिस दूध को हम बच्चों के पोषण, बुजुर्गों की सेहत और परिवार की ताकत का आधार मानते हैं, वही यदि रसायनों व कृत्रिम तत्वों से भरा हो, तो वह केवल धोखा नहीं, बल्कि धीमा जहर बन जाता है। आज दूषित और मिलावटी खानपान हमारे देश में एक बड़ी चुनौती बन चुका है। निस्संदेह, देश में खाद्य मिलावट कोई नई समस्या नहीं है, परंतु इसका स्वरूप और पैमाना, दोनों ही चिंताजनक रूप से बढ़े हैं। दूध में यूरिया, डिटर्जेंट और सिंथेटिक रसायनों की मिलावट, घी और खाद्य तेलों में सस्ते व हानिकारक तरल पदा...
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