रांची, मई 23 -- रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। राज्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत धान खरीद और मिलरों से होने वाली सरकारी वसूली व्यवस्था में एक बड़ा वित्तीय संकट सामने आया है। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार, खरीफ विपणन सत्र (केएमएस) 2011-12 से लेकर 2024-25 तक के कार्यकाल में कुल 127.92 करोड़ रुपये की वसूली राशि तय की गई थी। इनमें से अब तक केवल 17.26 करोड़ रुपये की ही वसूली हो सकी है, जबकि 110.66 करोड़ रुपये (86.5%) की बड़ी राशि अब भी बकाया है। आंकड़ा दर्शाता है कि मिलरों और संबंधित एजेंसियों से पैसे वसूलने की प्रक्रिया बेहद धीमी और चिंताजनक रही है। बकाया राशि मामले में शीर्ष जिलों में देवघर और हजारीबाग प्रमुख हैं。 यह भी पढ़ें- गेहूं खरीद में वारिसलीगंज और कौआकोल अव्वल, रजौली फिसड्डीप्रमुख आं...