जमशेदपुर, जुलाई 19 -- पूर्वी सिंहभूम जिले ने मिर्गी जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी के प्रबंधन में पूरे देश के लिए एक मॉडल पेश किया है। कभी सामाजिक कलंक और अंधविश्वास के साये में जीने वाले मिर्गी मरीजों के लिए यहां संचालित प्रोजेक्ट उल्लास एक वरदान बनकर आया है। दरअसल, मिर्गी के प्रति समाज में व्याप्त गलत धारणा के कारण हजारों मरीज इलाज से वंचित थे और सामाजिक अलगाव का दंश झेल रहे थे। प्रोजेक्ट उल्लास ने सबसे पहले इस सामाजिक बाधा को तोड़ा। जिले भर में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और आशा कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से ऐसे मरीजों की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित किया गया, जिससे गांव गांव में मरीजों की पहचान करना आसान हो गया। इस सामुदायिक स्तर की स्क्रीनिंग ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी मरीज चिकित्सा सहायता से अछूता न रहे। अब ये मरीज न केवल इलाज करव...