मधुबनी, अप्रैल 13 -- रविंद्र नाथ झा मधेपुर। मिथिला की सभ्यता व संस्कृति की सानी नहीं है। यहां की संस्कृति अप्रतिम है। मिथिला अपनी कला-संस्कृति, अप्रतिम परंपरा व पर्व-त्योहारों के लिए प्रसिद्ध है। यहां मनाये जाने वाली कुछ पर्व का जुड़ाव लोक-आस्था से हैं तो कुछ से आध्यात्म व धार्मिक मान्यतायें जुड़ी हुई है। इसी परम्परा व मान्यता को अक्षुण्न रखना मिथिला की पहचान है। इसी कड़ी में जुड़शीतल पर्व की भी अपनी मान्यताएं है। मंगलवार 14 अप्रैल तथा बुधवार 15 अप्रैल को जुड़शीतल पर्व है। पहले दिन सतुआइन व बड़ी भात तथा दूसरे दिन जुड़ाने के संग बासी-भात व बड़ी-खाने की परंपरा अब भी कायम है। यह भी पढ़ें- सलहेस पूजनोत्सव पर निकली कलश शोभा यात्रा जुड़शीतल पर्व मनाने की परंपरा अनोखी रही है। इसमें लोग थाल-कादो से खेलते हैं। इस खेल में बांस की पिचकाड़ी भी बनाया ...
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