समस्तीपुर, फरवरी 2 -- रोसड़ा। नौकरी सं रिटायर्ड भ गेलहुं, करब आब आराम रे., कान खोलि क सुनि ले बेटा, करबय नै कोनो काम रे."। इन पंक्तियों के साथ जब आचार्य विजयव्रत कंठ ने अपनी प्रस्तुति दी तो श्रोताओं का मन भावुक हो उठा। अवसर था मिथिला मंडन मंच, रोसड़ा के बैनर तले अवर निबंधक के आवासीय परिसर में आयोजित मासिक कवि गोष्ठी का। कार्यक्रम का शुभारंभ 'जय-जय भैरवि' के सामूहिक गान से हुआ। प्रथम प्रस्तुति डॉ. परमानंद मिश्र ने 'हे माय अहींक अभिवंदना' से की। त्रिलोकीनाथ ठाकुर ब्रजभूषण ने 'जठरा' शीर्षक कथा के माध्यम से देहाती श्रमिक की व्यथा को मार्मिक रूप में प्रस्तुत किया। वहीं डॉ. भास्कर ज्योति ने 'कर्सियांग यात्रा वृतांत' के जरिए पर्वतीय सौंदर्य का सजीव चित्रण किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. प्रवीण प्रभंजन ने नानी गांव में बच्चों की मौज-मस्ती का भावपू...
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