मित्रता निभाना ही सबसे बड़ा धर्म: यज्ञाचार्य
मिर्जापुर, जून 9 -- हलिया। क्षेत्र के गड़बड़ा शीतला धाम में शतचंडी महायज्ञ व रामकथा के छठें दिन सोमवार को परशुराम अखाड़ा प्रयागराज के तत्वावधान में चल रही संगीतमय राम कथा के दौरान यज्ञाचार्य धीरज द्विवेदी ने सीता की खोज में वनवन भटक रहे राम और ऋष्यमूक पर्वत के प्रसंग की कथा सुनाई। यह भी पढ़ें- पूर्णाहूति में आहूतियां देकर छोड़ी बुराईमित्रता का महत्व उन्होंने कहा कि मित्रता निभाना ही सबसे बड़ा धर्म है। कहा सुग्रीव ने हनुमान को ब्राह्मण वेश में भगवान राम के संबंध में पता लगाने के लिए भेजा। हनुमान ने भगवान राम को तत्काल पहचान गए और चरण पकड़ लिया। कहा- कि आप किस कार्य से यहां आए है। राम का परिचय पाते ही हनुमान अपने असली रूप में आ गए। धीरज द्विवेदी ने कहा कि पहला मिलन ही भक्त व भगवान का मिलन बन गया। पूरा पंडाल जय हनुमान से गूंज उठा। यह भी पढ़ें...
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