संभल, अप्रैल 22 -- मिडिल ईस्ट में युद्ध के तनाव के बीच भारत से चावल निर्यात एक बार फिर पटरी पर लौट आया है, लेकिन इस बार बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदली हुई है। बढ़ी हुई लागत, अनिश्चित सप्लाई चेन और कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। हालांकि बाजार में चावल निर्यात में सबसे बड़ा असर समुद्री भाड़े पर पड़ा है। जहां पहले एक कंटेनर का किराया 200 से 400 डॉलर के बीच था, वहीं अब यह बढ़कर 2300 से 2500 डॉलर तक पहुंच गया है। शिपिंग कंपनियों ने युद्ध के खतरे और बदले रास्ते की वजह से कई गुना भाड़ा बड़ा दिया है। कई जहाजों को सुरक्षित रास्तों से भेजा जा रहा है, जिससे ट्रांजिट टाइम भी लंबा हो रहा है। इसके साथ ही बीमा कंपनियों ने भी हाई रिस्क जोन में भेजे जाने वाले माल पर अतिरिक्त वार रिस्क प्रीमियम लगाना शुरू कर दिया ह...