चंदौली, मार्च 15 -- चंदौली, संवाददाता। माह-ए-रमजान में नमाज और कुरआन पढ़ने के साथ जकात और फितरा देने का भी बहुत अधिक महत्व है। ईद की नमाज से पहले हर मुसलमान को जकात और फितरा अदा करनी जरूरी होती है। हर मालिके निसाब एवं हैसियत मंद को जकात और फितरा निकालना फर्ज है। यह बातें शनिवार 24वें रोजे को मुख्यालय स्थित मदरसे में कारी अली अहमद ने हदीस बयान करते हुए कही। उन्होंने कहा कि जकात एक प्रकार का दान है। यह गरीबों, मिस्किनों, विधवाओं, अनाथ बच्चों या किसी बीमार व कमजोर और जरूरतमंद व्यक्ति को दिया जाता है। यह आमदनी से पूरे साल में जो बचत होती है। उसका 2.5 फीसदी हिस्सा दिया जाता है। यदि किसी के पास सोने चांदी के गहनों के रूप में भी कोई संपत्ति होती है तो उसकी कीमत के हिसाब से भी जकात दी जाती है। इसी तरह फितरा निकालना आवश्यक है। फितरे की रकम भी निर्...
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