संतकबीरनगर, मार्च 3 -- संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले में माह-ए-रमजान में जहां एक ओर इबादत का माहौल है, वहीं इफ्तार के समय घर-घर में नेमतों से सजे दस्तरखान भी नजर आ रहे हैं। खजूर, फल, पकौड़ी, शरबत व तरह-तरह के व्यंजनों से रोजेदारों का स्वागत हो रहा है। लेकिन इस रौनक के बीच समाज के उन जरूरतमंद परिवारों की चिंता भी जरूरी है, जिनके घरों में इफ्तार के वक्त चूल्हा तक मुश्किल से जल पाता है। मदरसा तालीमुल कुरान के मौलाना गुफरान नदवी ने कहा कि रमजान का असली पैगाम भूख व प्यास का एहसास कर इंसान को हमदर्द बनाना है। उन्होंने कहा नेमतों की कद्र उसी वक्त पूरी होती है जब हम अपने दस्तरखान से कुछ हिस्सा निकालकर ग़रीबों व बेसहारा लोगों तक पहुंचाएं। अगर हमारा पड़ोसी भूखा है। हम बेफिक्र हैं, तो यह रमजान की रूह के खिलाफ है। रोजेदारों से अपील की ...