कटिहार, फरवरी 28 -- बारसोई। निज प्रतिनिधि माह-ए-रमजान के दूसरे अशरे को मगफिरत का अशरा कहा जाता है, इस अशरे के दरमियान मोमिनों को चाहिए कि वें अल्लाह-ता-आला की बारगाह में हाथ उठाकर सच्चे दिल से अपने गुनाहों की माफी मांग ले, साथ ही बद अमालों से भी तौबा कर लें। उक्त बातें मौलाना व ईमाम मुजाहिदुल इस्लाम ने नगर पंचायत बारसोई स्थित जामे मस्जिद बारसोई में रमजान के दूसरे जुमे के मौके पर तकरीर के दौरान कही। उन्होंने बताया कि माह-ए-रमजान के मुकद्दस महीने को तीन अशरों में बांटा गया है। 10 से लेकर 20 रोजे को दूसरा अशरा कहा जाता है। इस अशरे के दरमियान परवर-दिगार-ए-आलम रोजेदारों के गुनाहों को माफ कर देते हैं। इस दौरान हर कोई अपने गुनाह की तौबा कर अल्लाह की पनाह पा सकता है। उन्होंने कहा कि हर बालिग मुस्लिम मर्द-औरतों पर रोजा फर्ज है। परिस्थितिवश बीमारों...