अलीगढ़, मार्च 20 -- (विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस) अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। नन्हे कदमों में जहां भविष्य की उम्मीदें झलकती हैं, वहीं कुछ मासूम ऐसे भी हैं जिनकी जिंदगी जन्म से ही चुनौतियों की गिरफ्त में कैद हो जाती है। डाउन सिंड्रोम जैसी जन्मजात स्थिति उनके मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित करने के साथ जीवन की अवधि भी सीमित कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली और देर से मातृत्व अपनाने की प्रवृत्ति इस समस्या को और बढ़ा रही है।देश में डाउन सिंड्रोम के मामलों में धीरे-धीरे वृद्धि देखी जा रही है। भारतीय शिशु रोग अकादमी (आईएपी) की अलीगढ़ इकाई के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप बंसल के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों में करीब 12 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में हर 700 से 800 नवजात में एक बच्चा इस सिंड्रोम से प्रभावित पाया...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.