मासूम पुत्र को लेकर आजादी के आंदोलन में कूदी थीं रानी राजेंद्र कुमारी
हमीरपुर, अगस्त 10 -- हमीरपुर, संवाददाता। देश की आजादी की लड़ाई में बुंदेलखंड की वीरांगनाओं में रानी राजेंद्र कुमारी भी अमर हो गईं। ढाई साल के मासूम पुत्र की बंदी के दौरान जेल में मौत के बावजूद रानी राजेंद्र कुमारी का हौसला नहीं टूटा। अपने जीवन में कई बार जेल की यात्राएं की। 1958 के उपचुनाव में उप्र के तत्कालीन सीएम चंद्रभानु गुप्ता को शिकस्त देकर विधायक भी बनीं थीं। राठ तहसील के मंगरौठ गांव के दीवान शत्रुघ्न सिंह आजादी के आंदोलन का बड़ा चेहरा हुआ करते थे। जमींदार परिवार से ताल्लुक रखने वाले दीवान साहब की धर्मपत्नी रानी राजेंद्र कुमारी भी उन्हीं के नक्शे कदम पर चलते हुए बुंदेलखंड की वीरांगनाओं में शुमार हो गई। दीवान साहब ने आचार्य विनोबा भावे के भूदान आंदोलन से प्रेरित होकर अपने गांव को दान कर दिया था。
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान जब बुंदे...
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