संभल, अप्रैल 2 -- श्री कल्कि धाम में बुधवार को आयोजित मासिक सत्संग में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सत्संग में श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आशीर्वचन देते हुए प्रेम की गहन व्याख्या की और उसे परमात्मा का प्रतिरूप बताया। सत्संग से पूर्व आचार्य श्री ने यज्ञ में आहुति दी। प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि परमात्मा के निकट पहुंचने का सबसे सरल मार्ग प्रेम है, लेकिन वह प्रेम निश्छल, निस्वार्थ और पूर्ण समर्पण वाला होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रेम में कोई कामना नहीं होती, वही शाश्वत होता है, जबकि कामना से युक्त प्रेम अस्थिर होकर अविश्वास को जन्म देता है। आचार्य कृष्णम ने उदाहरण देते हुए कहा कि मीराबाई का प्रेम शाश्वत था, इसलिए उन्हें कृष्णा की प्राप्ति हुई। उन्होंने श्रद्धालुओं से इसी प्रकार के निष्काम प्रेम का अनुसरण करने का...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.