नई दिल्ली, फरवरी 12 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। जलवायु खतरों से निपटने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में उत्सर्जन कम करने के प्रयास जारी हैं। लेकिन परिवहन क्षेत्र में उत्सर्जन कम करना अब भी चुनौती बना हुआ है। एक नई रिपोर्ट में इससे निपटने के लिए रणनीति बनाने पर जोर दिया गया है। आईआईएम बेंगलुरु, टेरी तथा स्मार्ट फ्रेट सेंटर इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत का फ्रेट (माल ढुलाई) सेक्टर जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही रफ्तार से इसका कार्बन फुटप्रिंट भी फैल रहा है, लेकिन इसे मापने का कोई फार्मूला अभी नहीं है। ऐसे में अब तक नीतियां केवल अनुमानों पर बनी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक ढुलाई से होने वाले प्रदूषण को मापा नहीं जाएगा, तब तक उसे वैज्ञानिक रूप से समझा भी नहीं जा सकेगा। इसी सिद्धांत के आधार पर यह दस्तावेज एक राष्ट्रीय स्तर पर स...