नई दिल्ली, अगस्त 24 -- मौत का समय पहले से तय हो और सामने खुद यमराज खड़े हों, तो इंसान क्या कर सकता है? पुराणों में एक ऐसी ही कहानी मिलती है, जिसमें एक बालक की उम्र सिर्फ 16 साल तय हुई थी। जैसे-जैसे उसकी उम्र उस पड़ाव के करीब पहुंची, घर में चिंता बढ़ने लगी। लेकिन बालक ने डरने के बजाय भगवान शिव की भक्ति को अपना सहारा बनाया। यह कहानी ऋषि मार्कंडेय की है। शिव से जुड़ी पुराणिक कथाओं में मार्कंडेय को भगवान शिव का बड़ा भक्त बताया गया है। कथा के मुताबिक उनके माता-पिता ने संतान के लिए भगवान शिव की तपस्या की थी। वरदान में उनके सामने एक विकल्प रखा गया-ऐसा बेटा जो गुणी और विद्वान हो, लेकिन उसकी उम्र कम हो, या फिर लंबी उम्र वाला लेकिन कम गुणों वाला बेटा। उन्होंने गुणी पुत्र को चुना। इसके बाद मार्कंडेय का जन्म हुआ। कहा जाता है कि मार्कंडेय की उम्र सिर्...