बांका, मई 26 -- बांका, नगर प्रतिनिधि/ राजदीप सिंह "मिट्टी की खुशबू से सपनों को उड़ान मिली, संघर्ष की राहों पर चलकर एक नई पहचान मिली।"

आदित्य आनंद की प्रेरणादायक कहानी अपने कठिन परिश्रम और मजबूत इरादों के दम पर जिले के युवा अभिनेता आदित्य आनंद आज अभिनय की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना रहे हैं। एक साधारण परिवार से निकलकर मायानगरी मुंबई तक का उनका सफर संघर्ष, जुनून और आत्मविश्वास की ऐसी मिसाल बन चुका है, जो जिले के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद आदित्य ने कभी अपने सपनों को मरने नहीं दिया और आज वह छोटे शहरों के युवाओं को यह संदेश दे रहे हैं कि मेहनत और लगन के दम पर कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है। 5 मई 1995 को मंदार की माटी में जन्मे आदित्य आनंद के पिता बादल तिवारी निजी ट्यूशन शिक्षक ह...