माफीनामा ठुकराकर हंसते हंसते फांसी पर झूल गया था भीखमपुर का लाल
लखीमपुरखीरी, अगस्त 15 -- मितौली, सर्वेश कटियार। जंग-ए-आजादी के आखिरी शहीद कहे जाने वाले तहसील मितौली के भीखमपुर गांव निवासी राज नारायण मिश्र को नौ दिसंबर 1944 को फांसी दी गई थी। सजा से बचने के लिए उनको माफीनामा देने की छूट भी दी गई थी लेकिन उन्होंने माफीनामा लिखने से इनकार कर दिया। आखिरकार अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें लखनऊ जेल में फांसी दें दी थी। यह भी पढ़ें- Lakhimpur Khiri News: शहीद स्मारक पर लगा कैंप, मरीजों का हुआ परीक्षणराज नारायण मिश्र की दास्तान राज नारायण मिश्र से जुड़ी दास्तान उनके गांव के लोग अब भी बड़ी शान से सुनाते हैं। उनके खानदान व रिश्तेदार बताते हैं कि मातृवेदी नाम के एक संगठन के जरिए वह युवाओं को अंग्रेजी सरकार के जुल्म की दास्तान तो बताते ही थे, साथ ही सरकारी मशीनरी के खिलाफ आंदोलन की जमीन भी तैयार कर रहे थे। यह संगठन वह ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.