दिल्ली, मार्च 25 -- भारत सरकार ने माना है कि देश में मनोचिकित्सकों की उपलब्धता राज्यों के बीच काफी असमान है.मध्य प्रदेश में प्रति एक लाख आबादी के लिए सिर्फ 0.05 मनोचिकित्सक हैं, जबकि केरल में यह संख्या 1.2 है"मुझे पिछले साल जुलाई में अमृतसर में स्थित एक निजी बैंक में नौकरी करने का अवसर मिला.मैं वहां अकेला रहता था.कुछ महीनों बाद ही मुझे गहरा अकेलापन महसूस होने लगा.काम और पढ़ाई में मेरा मन नहीं लग रहा था और बिना किसी कारण के थकान रहने लगी.शुरूआत में मैंने ध्यान नहीं दिया.एक दिन मुझे अपने आसपास आवाजें सुनाई देने लगीं.शरीर में झटके भी महसूस हुए.उसी वक्त मैंने तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने का फैसला किया" यह कहानी दिल्ली के रहने वाले आयुष की है.आयुष की तरह भारत में कई लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं.इसे लेकर समाज में मौजूद स्टिग्मा,...