रांची, जुलाई 16 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल मानसिक बीमारी (मेंटल इलनेस) का हवाला देकर कोई पति अपनी पत्नी को भरण-पोषण (मेंटेनेंस) देने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि मानसिक बीमारी होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति कमाने या अपने फैसले लेने में पूरी तरह अक्षम है। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें पति को अलग रह रही पत्नी को हर महीने 3,000 रुपये अंतरिम भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने पति की याचिका खारिज करते हुए कहा कि निचली अदालत के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। मामले के अनुसार, दिसंबर 2021 में फैमिली कोर्ट ने पति को पत्नी को प्रति माह 3,000 रुपये अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। ...