ललितपुर, मई 29 -- तालबेहट। नगर सहित आस पास क्षेत्र के लोगों और वन्य जीवों के लिए जीवनदायिनी ऐतिहासिक मानसरोवर झील इन दिनों अवैध कब्जों और अव्यवस्थित निर्माण के कारण अपने मूल स्वरूप को खोती जा रही है। जिम्मेदार अधिकारी इसको बचाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। सैकड़ों वर्ष पूर्व लगभग 600 एकड़ क्षेत्रफल में मानसरोवर झील का निर्माण कराया गया था। नौर नाले और वर्षा जल के माध्यम से यह झील भरकर पूरे क्षेत्र के भूजल स्तर को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती चली आ रही है। झील के किनारे केवट समुदाय को लगभग 20 से 30 वर्ष पूर्व मुरार, कमल की खेती और मत्स्य पालन के लिए पट्टे दिए गए थे। यह भी पढ़ें- मानसरोवर झील की भूमि पर अवैध कब्जा स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय के साथ पट्टे की भूमि तथा किसानों की भूमिधरी ...