मानव हृदय ही संसार का सागर: रणधीर
गाजीपुर, मई 20 -- गाजीपुर। शहर टेढ़ी बाजार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन रणधीर ओझा ने भगवान के 24 अवतारों, समुद्र मंथन, ध्रुव चरित्र और राजा परीक्षित प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यह संसार भगवान का सुंदर बगीचा है और जब-जब पाप बढ़ता है, तब भगवान अवतार लेकर सज्जनों की रक्षा और दुष्टों का विनाश करते हैं। समुद्र मंथन प्रसंग की व्याख्या करते हुए आचार्य ने कहा कि मानव हृदय ही संसार का सागर है, जहां अच्छे और बुरे विचार देवता और दानव के समान मंथन करते रहते हैं। उन्होंने ध्रुव चरित्र सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए उम्र बाधा नहीं होती। यह भी पढ़ें- श्रीहरि नाम ही कलियुग का सहारा, भंक्ति का संदेश बचपन से ही बच्चों को संस्कार और भक्ति की प्रेरणा देनी चाहिए। कथा के दौरान सती चरित्र, राजा परीक्षित और शुकदेव प्रसंग का उल्ले...
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