रांची, अगस्त 13 -- रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के कुलपति प्रो. डॉ. डीके सिंह ने कहा कि वर्तमान दौर में एआई आंकड़ों का तेजी से विश्लेषण कर दिशा-निर्देश और सुझाव तो दे सकता है, लेकिन यह कभी भी मानव मस्तिष्क की मौलिक सोच का विकल्प नहीं बन सकता। पहले व्यक्ति स्वयं अपनी विवेकशीलता से निर्णय लेता था, जबकि आज एआई की विश्लेषणात्मक क्षमता से स्वास्थ्य क्षेत्र में नई राहें खुल रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच ई-कचरा प्रबंधन को भी एक बड़ी चुनौती बताया। डॉ सिंह गुरुवार को एनएचएम, झारखंड और झारखंड स्टैटिस्टिकल सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में नामकुम स्थित आरसीएच कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित दो दिवसीय डेटा क्वालिटी वर्कशॉप के उद्घाटन सत्र...