फतेहपुर, मई 15 -- फतेहपुर। परिवहन निगम की बसों में ड्राइवरों के ठीक पीछे वाली दो आरक्षित सीटें दशकों से सूनी हैं। यह सीटें क्षेत्र के सांसदों, विधायकों और एमएलसी (विधान परिषद सदस्यों) के लिए आरक्षित की जाती हैं। मकसद था कि जनता के प्रतिनिधि जनता के बीच बैठकर सफर करें, लेकिन हकीकत यह है कि बीते 20 सालों से किसी भी 'माननीय' ने इन सीटों पर कदम तक नहीं रखा। वे बसों के बजाय अपने लग्जरी निजी वाहनों में चलना पसंद करते हैं। रोडवेज की माने तो करीब दो दशक से रोडवेज की इन आरक्षित सीटों पर सांसद या विधायक सहित एमएलसी ने सफर नहीं किया। लेकिन गत दिनों डीजल पेट्रोल का कम प्रयोग किए जाने की अपील के साथ ही जनप्रतिनिधियों को महीने में एक बार ट्रेन या बस से यात्रा किए जाने की अपील की थी। जिससे आम जनमानस से उनका सीधा जुड़ाव होने के साथ ही सिस्टम की कमियां भी ...