गंगापार, दिसम्बर 24 -- तहसील मुख्यालय से लगभग बीस किलोमीटर के दायरे में मौजूद मेजा का पठारी इलाका पत्थर माफियाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है,वहीं जंगली जीवों व स्थानीय लोगों के लिए जांनलेवा साबित हो रहा है। भटौती, सींकी, कोहड़ार सहित कई ऐसे गांव हैं, जहां पठारी क्षेत्र में घना जंगल हुआ करता था, दुलर्भ प्रकार की जंगली जीव स्वच्छन्द विचरण करते थे, अब ऐसा नहीं है। अकेले भटौती पहाड़ी पर डेढ़ दर्जन से अधिक क्रसर प्लांट पत्थर तोड़ने में जुटे हुए हैं। शोरगुल होने व जंगली पेड़-पौधों के कट जाने से जंगली जीवों का अब दूर-दूर तक पता नहीं रह गया। मानक से अधिक पत्थरों के निकाल लिए जाने से भटौती पहाड़ी खोह के रूप में तब्दील हो गई। मलाईदार विभाग के अधिकारी जब भी शिकायत पर जांच करने पहुंचते हैं, महज खानापूर्ति कर लौट जाते हैं। तालाब के शक्ल में मौजूद इन गहरे ग...
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