लखनऊ, मार्च 12 -- लखनऊ, विशेष संवाददाता।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण की तैयारी के तहत बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छटनी की गई है। यह लगातार की जा रही है, जिससे गर्मियों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि नए टेंडरों में तय मानकों के विपरीत लगभग 45 प्रतिशत तक संविदा कर्मियों की कमी कर दी गई है, जिसके कारण प्रदेश के विभिन्न जनपदों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे का कहना है कि यह प्रक्रिया अक्तूबर 2024 से ही शुरू कर दी गई थी। पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष ने नवंबर 2024 में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निज...