नई दिल्ली, फरवरी 18 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। राष्ट्रीय राजधानी में सीवेज प्रबंधन की खामियां एक बार फिर उजागर हुई हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पाया है कि दिल्ली के नौ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतर रहे। इसके चलते रोजाना करीब 88 मिलियन गैलन (एमजीडी) सीवेज का समुचित उपचार नहीं हो पा रहा है। एनजीटी ने इसे गंभीर पर्यावरणीय चूक बताते हुए नाराजगी जाहिर की है। एनजीटी के समक्ष पेश आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में प्रतिदिन लगभग 792 एमजीडी सीवेज उत्पन्न होता है, लेकिन उपचार की स्थापित क्षमता 704 एमजीडी है। क्षमता और वास्तविक उपचार के बीच यह अंतर पहले से ही चिंता का विषय है, लेकिन नौ एसटीपी के मानकों पर खरा न उतरने से स्थिति और गंभीर हो गई है। इन संयंत्रों के अपेक्षित स्तर पर काम न करने से बड़ी मात्र...