मथुरा, नवम्बर 8 -- वृंदावन। रेतिया बाजार स्थित श्रीजी मंदिर में भगवान निंबार्काचार्य की 5121वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में विद्वत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें भगवान निंबार्काचार्य द्वारा प्रदत्त रसोपासना विषय पर संतों व विद्वतजनों ने विचार व्यक्त किए। गोरी लाल मंदिर के महंत किशोर दास ने बताया कि भगवान श्रीनिंबार्काचार्य न केवल द्वैतवाद दर्शन के आचार्य थे वल्कि माधुर्य उपासना के प्रवर्तक भी थे। रेहती पंडा ने कहा कि श्रीनिंबार्काचार्य की उपासना का मूल भाव परमात्मा को प्रेम और सेवा से पाना रहा। डॉ. जीके दुबे ने कहा कि ज्ञान कर्म योग सब साधन साधन हैं, परंतु रसोपासना में प्रेम ही अंतिम साधन बन जाता है। जयकिशोर शरण ने कहा कि रसोपासना केवल ध्यान नहीं सेवा भाव से युक्त भक्ति है। डा चंद्रप्रकाश शर्मा ने कहा कि भगवान को जो मित्र ,सखा या प्रेम...
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